REET आकलन, मापन एवं मूल्यांकन, NCF-2005 | बाल विकास एवं शिक्षण विधियाँ | REET 2025 | मनोविज्ञान | महत्वपूर्ण प्रश्न by RPSC | December 25, 2024 Facebook फ्री टेस्ट , नोट्स और अपडेट के लिए Join करे 👇👇 Join WhatsApp Join Now Join Telegram Join Now Report a question What’s wrong with this question? You cannot submit an empty report. Please add some details. /20 45 1234567891011121314151617181920 आकलन, मापन एवं मूल्यांकन, NCF-2005 | बाल विकास एवं शिक्षण विधियाँ | REET 2025 | मनोविज्ञान | महत्वपूर्ण प्रश्न 🔴महत्वपूर्ण निर्देश 🔴 ✅ टेस्ट शुरू करने से पहले कृपया सही जानकारी भरे | ✅ सभी प्रश्नों को आराम से पढ़कर उत्तर दे | ✅सभी प्रश्नों का उत्तर टेस्ट पूर्ण करने पर दिखाई देगा | ✅ टेस्ट पूर्ण करने पर सभी प्रश्नों के उत्तर विस्तार से समझाया गया है | Name 1 / 20 1. किस गुण के कारण परीक्षा में शुद्धता रहती है? विभेदकारिता वस्तुनिष्ठता वैधता विश्वसनीयता Solution • वैधता (Validity)– • कॉलसनिक- वैध परीक्षण वह है जो उन्हीं विशिष्टताओं व गुणों का मापन करती है, जिनको मापन के लिए बनाया गया है। • प्रेसी, रॉबिन्स व हॉरम्स- परीक्षण में वैधता तभी होती है जब वह वास्तव में उसी बात का मापन करता है जिसके मापन की उससे आशा की जाती है। • यदि कोई परीक्षण वही मापन करता है जिसके मापन के लिए इसका निर्माण हुआ है तो वह परीक्षण वैध (Valid Test) कहलाता है। • इस प्रकार वैधता गुणक (Validity Index) यह सूचित करता है कि किसी परीक्षण ने वस्तुतः उसी विशेषता (Trait) का मापन किस सीमा तक किया है? जिसका मापन करने के लिए वह दावा करता है। उदाहरणार्थ, हिन्दी की परीक्षा को वैध तभी कहेंगे जबकि उसके द्वारा हम हिन्दी की योग्यता का ही मापन करें, इसके अतिरिक्त भाषा की योग्यता, स्वच्छता अथवा सामान्य बुद्धि का नहीं। • वैधता के कारण परीक्षा में शुद्धता बनी रहती है। 2 / 20 2. निम्नलिखित में से कौन नेशनल स्टीयरिंग कमेटी NCF-2005 के अध्यक्ष थे? श्री अर्जुन सिंह प्रो. यशपाल प्रो. कृष्ण कुमार प्रो. वेद प्रकाश Solution • नेशनल स्टीयरिंग कमेटी NCF-2005 के अध्यक्ष प्रो. यशपाल हैं। प्रो. यशपाल की अध्यक्षता में गठित समिति की रिपोर्ट जिसका शीर्षक था। ‘लर्निंग विदाउट बर्डन’ (शिक्षा बिना बोझ के) 1993, साथ ही 21 राष्ट्रीय फोकस समूहों का भी गठन किया गया। 3 / 20 3. सबसे अधिक प्रचलित तथा लोकप्रिय मापनी है– अन्तराल मापनी अनुपात मापनी क्रमिक मापनी शाब्दिक मापनी Solution • अनुपात मापनी – • सबसे अधिक प्रचलित तथा लोकप्रिय मापनी है क्योंकि इसके द्वारा मापन अत्यधिक यथार्थ तथा शुद्ध रहता है। • मापन की यह वस्तुनिष्ठ, विश्वसनीय तथा वैज्ञानिक मापनी है। • इस मापनी की प्रमुख विशेषता निरपेक्ष शून्य बिन्दु है। इस शून्य बिन्दु का संबंध किसी घटना, शीलगुण अथवा विशेषता की शून्य मात्रा से होता है। • इस मापनी का प्रयोग मुख्य रूप से भौतिक शास्त्र के विभिन्न चरों – तापक्रम, भार, आयतन आदि का मापन करने के लिए किया जाता है। 4 / 20 4. “जिस वस्तु का भी अस्तित्व है, उसका किसी-न-किसी मात्रा में अस्तित्व होता है और जो कुछ भी किसी मात्रा में उपस्थित है, उसे मापा जा सकता है।” कथन संबंधित है- स्कीनर थॉर्नडाइक मॉरीसन ई.बी. वैस्ले Solution • थॉर्नडाइक – “जिस वस्तु का भी अस्तित्व है, उसका किसी-न-किसी मात्रा में अस्तित्व होता है और जो कुछ भी किसी मात्रा में उपस्थित है, उसे मापा जा सकता है।” • ई.बी. वैस्ले- “मापन, मूल्यांकन का वह भाग है जो प्रतिशत, मात्रा, अंकों, मध्यांक और मध्यमान द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।” 5 / 20 5. एन.सी.एफ.-2005 का विस्तार रूप है- नेशनल करीकुलम फ्रेम वर्क, 2005 नेशनल कॉमन फ्रेम वर्क, 2005 नेशनल क्लास फ्रेम वर्क, 2005 उपर्युक्त में से कोई नहीं Solution • N.C.F.-2005 का विस्तार रूप राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (नेशनल करीकुलम फ्रेमवर्क) – 2005 हैं। • N.C.F.-2005 में कुल 5 अध्याय है तथा पाठ्यचर्या निर्माण के 5 मार्गदर्शक सिद्धान्त है जो निम्न हैं- 1. ज्ञान को स्कूल के बाहर के जीवन से जोड़ना। 2. पढ़ाई रटंत प्रणाली से मुक्त हो यह सुनिश्चित करना। 3. पाठ्यचर्या का इस तरह संवर्धन कि वह बच्चों को (चहुँमुखी) विकास के अवसर मुहैया करवाए बजाए इसके कि पाठ्यपुस्तक-केंद्रित बन कर रह जाए। 4. परीक्षा को अपेक्षाकृत अधिक लचीला बनाना और कक्षा की गतिविधियों से जोड़ना। 5. एक ऐसी अधिभावी पहचान का विकास जिसमें प्रजातांत्रिक राज्य-व्यवस्था के अंतर्गत राष्ट्रीय चिंताएँ समाहित हों। 6 / 20 6. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2005 किस सूझ के आधार पर पाठ्यचर्या के बोझ को कम करने पर बल देती है? शिक्षा, बिना बोझ के बोझ युक्त अधिगम के शिक्षा के संकुचित अर्थ के मानसिक स्वास्थ्य के Solution – राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2005 शिक्षा, बिना बोझ के आधार पर पाठ्यचर्या के बोझ को कम करने पर बल देती है। इसके अनुसार मानसिक स्तर एवं योग्यता के अनुसार पाठ्यक्रम का निर्धारण होना चाहिए। 7 / 20 7. एन.सी.एफ.-2005 में कला शिक्षा को जोड़ने का उद्देश्य है- तार्किक चिंतन में अभिवृद्धि वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास सांस्कृतिक विरासत की सराहना ऐतिहासिक जगहों का परिभ्रमण Solution • N.C.F.-2005 में कला शिक्षा को शामिल करने का उद्देश्य – • कला शिक्षा ना केवल छात्रों में रचनात्मकता और कला की प्रशंसा विकसित करने के लिए प्रासंगिक है बल्कि छात्रों में कला आधारित पूछताछ कौशल को विकसित करने के लिए भी आवश्यक है। • छात्रों के व्यक्तित्व और मानसिक स्वास्थ्य को विकसित करने के लिए। • अत: N.C.F.-2005 में कला शिक्षा को शामिल करने का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत की सराहना करना है। 8 / 20 8. निम्नलिखित मे से असत्य कथन है– मापन किसी वस्तु या उपलब्धि का संख्यात्मक मान है। मापन, मूल्यांकन का ही भाग है। मापन में मूल्यांकन निहित है। मूल्यांकन में मापन निहित है। Solution • मापन व मूल्यांकन – • मापन किसी वस्तु या उपलब्धि का संख्यात्मक मान है। • मापन, मूल्यांकन का ही भाग है। • मूल्यांकन में मापन निहित है। • मापन का क्षेत्र सीमित जबकि मूल्यांकन का क्षेत्र व्यापक है। • मापन में केवल परिमाणात्मक निर्णय ही लिए जाते हैं। • मूल्यांकन में गुणात्मक तथा परिमाणात्मक दोनों ही प्रकार के निर्णय किए जा सकते हैं। 9 / 20 9. एन.सी.एफ.-2005 का प्रस्ताव है कि मूल्यांकन प्रणाली आधारित होनी चाहिए- अंक पर ग्रेड पर अंक और ग्रेड दोनों पर उपर्युक्त में से कोई नहीं Solution • राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) का प्रस्ताव है कि मूल्यांकन प्रणाली केवल अंकों के बजाय ग्रेड पर आधारित होनी चाहिए।ग्रेड केवल संख्यात्मक अंकों पर ध्यान केन्द्रित करने के बजाय, उनकी समग्र समझ और ज्ञान के अनुप्रयोग को ध्यान में रखते हुए एक छात्र के प्रदर्शन का अधिक समग्र और व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। • ग्रेड मूल्यांकन के लिए अधिक समावेशी और शिक्षार्थी – केन्द्रित दृष्टिकोण को भी प्रोत्साहित करते हैं जिससे विभिन्न शिक्षण शैलियों और क्षमताओं को पहचानने और महत्त्व देने की अनुमति मिलती है। 10 / 20 10. आकलन की पद्धति है– अधिगम के लिए आकलन अधिगम के रूप में आकलन अधिगम का आकलन उपर्युक्त सभी Solution • आकलन की पद्धति – समसामयिक अनुसंधान आकलन के तीन मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डालता है, जो निम्न प्रकार से हैं – • अधिगम के लिए आकलन – • अधिगम के लिए आकलन शिक्षण क्रिया के दौरान किया जाता है जिससे कि आगे की प्रक्रिया में सुधार किया जा सके। इस आकलन में दो चरण शामिल हैं – • निदानात्मक आकलन • रचनात्मक आकलन • अधिगम के लिए आकलन में पोर्टफोलियो, कार्य प्रगति पत्रक, शिक्षक अवलोकन व बातचीत आधारित हो सकते हैं। • अधिगम के रूप में आकलन – • यह छात्रों के द्वारा सीखने की प्रक्रिया के दौरान होता है। • स्वयं की शक्तियों की पहचान करवाने के लिए उपयोगी अर्थात् स्वयं का स्वयं के द्वारा आकलन। • अधिगम का आकलन – • यह आकलन कार्य समाप्ति पर किया जाता है। • इसमें ग्रेड द्वारा परिणाम प्रदर्शित किया जाता है। (योगात्मक मूल्यांकन के रूप में) • विद्यार्थियों के उपलब्धि की सूचना दी जाती है। 11 / 20 11. निम्नलिखित में कौन-सा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2005 ढाँचे में मार्गदर्शक सिद्धांत नहीं है? ज्ञान को स्कूल के बाहर के जीवन से जोड़ना। परीक्षा को अधिक लचीला और कक्षा जीवन में एकीकृत करना। पढ़ाई को रटंत प्रणाली से युक्त रखना। पाठ्य-पुस्तक केन्द्रित रहने की बजाय बच्चों के समग्र विकास के लिए समृद्ध पाठ्यचर्या प्रदान करना। Solution • राष्ट्रीय पाठ्यचर्या के रूपरेखा हेतु प्रो. यशपाल की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया। • यशपाल समिति ने पाठ्यचर्या निर्माण के पाँच निर्देशक सिद्धान्तों का प्रस्ताव रखा है- 1. ज्ञान को स्कूल के बाहर के जीवन से जोड़ना। 2. परीक्षा को अधिक लचीला और कक्षा जीवन में एकीकृत करना। 3. पढ़ाई को रटंत प्रणाली से मुक्त रखना। 4. पाठ्य-पुस्तक केन्द्रित रहने की बजाय बच्चों के समग्र विकास के लिए समृद्ध पाठ्यचर्या प्रदान करना। 5. प्रजातांत्रिक राज्य-व्यवस्था के अन्तर्गत ऐसी पहचान का विकास करना जिसमें राष्ट्रीय चिन्ताएँ समाहित हो। 12 / 20 12. आकलन के प्रकार है– रचनात्मक आकलन योगात्मक आकलन 1 और 2 दोनों उपर्युक्त में से कोई नहीं Solution • आकलन के प्रकार – आकलन दो प्रकार के होते हैं- • रचनात्मक आकलन- • यह आकलन शिक्षण काल में होता है। • यह पता लगाने के लिए होता है कि क्या विद्यार्थियों ने विशिष्ट कलाओं में पर्याप्त दक्षता प्राप्त कर ली है। • यह आकलन विद्यार्थियों को पृष्ठपोषण देने के लिए किया जाता है। • योगात्मक आकलन- • इस आकलन में मापन की भूमिका सब सीखी हुई कुशलताओं में निष्पादन का एक सम्पूर्ण अवलोकन देना है। 13 / 20 13. NCF-2005 में किन शिक्षण सूत्रों के अधिकतम प्रयोग का सुझाव दिया है- ज्ञात से अज्ञात की ओर मूर्त से अमूर्त की ओर अज्ञात से ज्ञात की ओर 1 और 2 दोनों Solution – NCF-2005 में ‘ज्ञात से अज्ञात की ओर’ ‘मूर्त से अमूर्त की ओर’ शिक्षण सूत्रों के अधिकतम प्रयोग का सुझाव दिया है। ‘ज्ञात से अज्ञात की ओर’ इस शिक्षण सूत्र के अनुसार शिक्षक को छात्रों को पहले वह बातें बतानी चाहिए, जिससे कि छात्र परिचित है, फिर इन परिचित बातों से सम्बन्धित अपरिचित या अज्ञात बातें, इन परिचित बातों के साथ जोड़कर छात्र को बतानी चाहिए। मूर्त से अमूर्त की ओर, इस शिक्षण सूत्र के अनुसार छात्रों को पहले दिखाई देने वाली वस्तु को बतानी चाहिए तत्पश्चात् कल्पना के आधार पर अमूर्त बातें बतानी चाहिए। 14 / 20 14. निम्नलिखित में से कौन-सी मूल्यांकन की प्रविधियाँ है? परिमाणात्मक प्रविधियाँ गुणात्मक प्रविधियाँ 1 और 2 दोनों उपर्युक्त में से कोई नहीं Solution 15 / 20 15. स्वयं का स्वयं के द्वारा आकलन कहलाता है– सीखने के लिए आकलन सीखने के लिए आकलन सीखने का आकलन उपर्युक्त में से कोई नहीं Solution • सीखने के रूप में आकलन– • यह छात्रों के द्वारा सीखने की प्रक्रिया के दौरान होता है। • स्वयं की शक्तियों की पहचान करवाने के लिए उपयोगी अर्थात् स्वयं का स्वयं के द्वारा आकलन। 16 / 20 16. NCF-2005 का प्रारम्भ किसके निबन्ध ‘सभ्यता और प्रगति’ से हुआ है? रवीन्द्र नाथ टैगोर महात्मा गांधी विवेकानन्द भीमराव अंबेडकर Solution – राष्ट्रीय 2005 का प्रारम्भ रवीन्द्र नाथ टैगोर के निबन्ध- ‘सभ्यता और प्रगति’ से हुआ है, जिसमें उन्होंने बताया है कि सृजनात्मक उदार ‘आनंद’ बचपन की कुंजी है। NCF का निर्माण मानव विकास संसाधन मंत्रालय की देखरेख में किया गया था। 17 / 20 17. NCF-2005 बल देता है– करके सीखने पर रटने पर समस्या हल करने पर उपर्युक्त सभी Solution • NCF-2005 ‘करके सीखने पर’ बल देता है। करके सीखना अर्थात् जो कार्य स्वयं करके सीखा जाता है, उसका अधिगम स्थायी और लम्बे समय तक रहता है। • बालक को ऐसे अवसर प्रदान करें कि वह खुद सीखे, नए-नए प्रयोग करे उसे आजमाये और खुद ही सुधार करे ताकि ज्यादा से ज्यादा सीख सके। 18 / 20 18. सत्र के अंत में किया जाने वाला आकलन है– रचनात्मक आकलन योगात्मक आकलन उपचारात्मक मूल्यांकन निदानात्मक मूल्यांकन Solution • योगात्मक आकलन – यह सत्र के अंत में किया जाने वाला आकलन है। • योगात्मक आकलन में मापन की भूमिका सब सीखी हुई कुशलताओं में निष्पादन का एक सम्पूर्ण अवलोकन देना है। • योगात्मक आकलन का उपयोग ग्रेड देने के लिए किया जाता है। 19 / 20 19. NCF-2005 के अनुसार शिक्षक की भूमिका होनी चाहिए- अधिनायकीय सत्तावादी सुविधादाता आलोचकीय Solution – NCF-2005 के अनुसार शिक्षक की भूमिका सुविधादाता के रूप में होनी चाहिए। वह बालक की कमियों को दूर करे और मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए। इसके अनुसार कक्षा में अध्यापक की भूमिका एक उत्प्रेरक के रूप में होनी चाहिए, जिससे छात्र उत्तेजित होकर शिक्षा प्राप्त कर सकें। 20 / 20 20. आकलन है– मूल्यांकन का एक भाग शिक्षण व्यवस्था का एक भाग शिक्षण विधि का एक भाग शिक्षण सामग्री का एक भाग Solution • आकलन – यह मूल्यांकन का ही एक भाग होता है, जिसका सामान्य अर्थ सूचनाओं को एकत्र करने की प्रक्रिया से है। • सीखने-सिखाने की प्रक्रिया के दौरान ही बच्चों के सीखने में रह गई कमियों को पहचानने की प्रक्रिया है। • सीखने-सिखाने के दौरान ही आकलन के लिए विभिन्न कार्य नीतियों का उपयोग करते हुए साक्ष्य इकट्ठे किए जाते हैं, उनका विश्लेषण करना, इसके अन्तर्गत बच्चों को आवश्यकतानुसार समय पर सहायता देने के लिए शिक्षकों द्वारा अपनी शिक्षण अधिगम प्रक्रिया की समीक्षा व सुधार भी शामिल हैं। Your score is 0% पुनः प्रारम्भ करे आपको यह क्विज कैसी लगी ….रेटिंग दे | धन्यवाद 😍 👇👇 Send feedback फ्री टेस्ट , नोट्स और अपडेट के लिए Join करे 👇👇 Join WhatsApp Join Now Join Telegram Join Now